चम्पा के मजाक की कहानी

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चम्पा के मजाक की कहानी

चम्पा के मजाक की कहानी हिंदी में :- बहुत पुरानी बात है भारत के सुदूर उत्तर की तरफ पहाडों के बीच एक छोटा सा गाँव बड़कोट स्थित था। गाँव के ज्यादातर लोग कृषि और पशुपालन का कार्य किया करते थे। बड़कोट गांव के लोग गाय, भैंस, भेड़, बकरी आदि कई तरह के जानवर पाला करते थे।

पहाड़ के इस गांव के लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि था लेकिन पहाड़ पर खेती करना बड़ा कठिन होता है, सीढ़ीनुमा खेत होते हैं और खेतों में पानी देने के लिए वर्षा पर निर्भर रहना पड़ता है जिस कारण अपना पेट भरने लायक खेती भी बड़ी मुश्किल से होती थी इसलिए सभी लोग पशुओं के चारे के लिए जंगल पर निर्भर रहा करते थे।

सभी गाँव वालों के पास पशु थे तो उनके चारे की व्यवस्था करने के लिए गांव वाले समूह में जंगल जाया करते थे। जहाँ से उन्हें घास, पेडों के पत्ते, जडी बूटियाँ मिल जाया करती थीं जिससे वो पशुओं के पेट भरा करते थे। समूह बना कर जंगल में जाने का एक कारण जंगली जानवरों का डर भी था।

गांव के आस-पास के जंगल बहुत ही घने थे साथ ही उनमें जंगली जानवर रहते थे जो प्रायः जंगल में घास काटने और लकड़ी बिनने वाले लोगों पर हमला कर दिया करते थे, कई लोग और पालतू जानवर बाघ, भालू, भेडियों और जंगली जानवरों के शिकार बन चुके थे इसलिए लोग समूह बना कर ही जंगल में जाया करते थे।

इसी गाँव में चम्पा नाम की स्त्री रहती थी। वह बहुत ही चंचल और मजाकिया किस्म की थी। इसलिए वो सभी के साथ मजाक करती रहती थी। क्या छोटा क्या बड़ा, चम्पा के मजाक से शायद गाँव का कोई ही व्यक्ति होगा जो बचा होगा।

एक दिन चम्पा और उसकी कुछ सहेलियाँ अपने पालतू पशुओं के लिए घास काटने जंगल गये हुए थे। घास काटते हुए कुछ देर हुई ही थी कि चम्पा जोर से चिल्लाई “भागो-भागो बाघ आया!”

चम्पा “भागो-भागो”

यह सुनते ही उसके साथ के लोग एकदम से सकपका गये। उन्होंने न आव देखा न ताव और भागने लगे। इसी आपाधापी में एक सहेली लड़खड़ाई और 2-3 गुलाटी मारते हुए गिर गई।

ये चीख पुकार सुन उनसे थोड़ी ही दूर लकड़ी काट रहे और गाँव के लोग हथियार लेकर चम्पा और उसकी सहेलियों के पास आये और उनसे पूछा “कहां है बाघ।”

यह सुनते ही चम्पा अपना पेट पकड़कर जोर-जोर से हँसने लगी। लोगों को समझ नहीं आ रहा था कि ऐसी घटना के बाद भी कोई कैसे हँस सकता है। लोग असमंजस में थे कि चम्पा को हुआ क्या है, सदमा बैठ गया या भूत प्रेत लग गया।

सब पूछें पर चम्पा का हँसना बन्द ही न हो, बड़ी मुश्किल से हँसी रोकते हुए बताया कि “वह तो मजाक कर रही थी। तुम सब इतने बेवकूफ हो कि मेरा मजाक भी नहीं समझ पाए।” अपनी सहेली कि तरफ इशारा करते हुए वो फिर बोली “देखो इस बेवकूफ को ये तो दोड़ते-दोड़ते मुँह के बल ही गिर पड़ी।” और फिर वह जोर-जोर से हँसने लगी।

चम्पा की सहेली गिरने की वजह से घायल हो चुकी थी इस दुर्घटना में उसकी जान भी जा सकती थी। यह देख सभी गांव वालों को बहुत गुस्सा आया सबने चम्पा को खरीखोटी सुनाई। उसकी सहेलियाँ भी बहुत गुस्सा थीं लेकिन चम्पा पर किसी बात का कोई असर नहीं पड़ा। वह तो अपने मजाक और दूसरों को बेवकूफ बनाकर ही खुश थी।

कुछ दिन बीते है थे कि जंगल में घास काटते-काटते चम्पा अपने सहेलियों से दूर निकल गयी और उस पर भालू ने हमला कर दिया। चम्पा चिल्लाई “बचाओ-बचाओ, जंगली भालू।”

चम्पा की सहेलियों ने और जंगल में लकड़ी काट रहे लोगों ने चम्पा की आवाज सुनी पर कोई चम्पा को बचाने को नहीं भागा सबको यही लगा कि यह भी चम्पा का कोई मजाक है पिछली बार बाघ ने हमला किया था और इस बार भालू। कोई भी चम्पा के पास जाकर अपना मजाक नहीं बनवाना चाहता था।

कुछ देर बाद लोगों ने देखा की चम्पा खून से लथपथ है उसके चेहरे पर भालू के पंजे का बड़ा सा निशान है जिसकी वजह से उसकी एक आंख खराब हो चुकी है। वो रोने लगी और सबसे माफी मांगते हुए बोली कि “मेरे एक गलत मजाक के कारण आज मेरी यह हालत हुई है, अगर में उस दिन गंदा मजाक न करती तो आज शायद ये न होता।”

चम्पा को अपनी गलती का एहसास हो चुका था लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी। अब उसकी आँख की रोशनी को वापस नहीं लाया जा सकता था।

चम्पा अब एक आँख वाली चम्पा के नाम से जानी जाने लगी, बात-बात पर दूसरों का मजाक बनाने वाली चम्पा अब किसी का मजाक नहीं उड़ाती थी क्योंकि अब वह खुद एक मजाक बनकर रह गयी थी।

कहानी से शिक्षा

इस कहानी से ये शिक्षा मिलती है कि कभी किसी के साथ ऐसा मजाक न करें कि व्यक्ति विशेष कि भावनाएं आहत हों या उसकी जान पर बन आये। मजाक करना बुरी बात नहीं है लेकिन मजाक मर्यादा में होना चाहिए। आपका मजाक किसी को नीचा या किसी से कमतर महसूस कराये तो निश्चित ही वह मजाक नहीं बल्कि द्वेष की भावना से किया गया कृत्य है।

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